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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने हेतु विभिन्न घोषणाएं की गईं

Finance minister Nirmala Sitharaman announces raft of measures to boost economy, more steps on anvil


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेस करके देश की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए विभिन्न घोषणाएं की हैं इन घोषणाओं में विदेशी और घरेलू निवेशकों पर सरचार्ज हटाने का फैसला किया गया। इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया कि सीएसआर कानून का उल्लंघन अब आपराधिक मामला नहीं होगा अब यह सिविल लायबिलिटी होगा

वित्त मंत्री ने प्रेस कांफ्रेस करते हुए पत्रकारों को कहा कि सरकार के उद्देश्यों में आर्थिक सुधर सबसे ऊपर है उन्होंने कहा कि करदाताओं को परेशान नहीं किया जायेगा साथ ही जो लोग देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं उनका सम्मान किया जायेगा


निर्मला सीतारमण द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 1 अक्टूबर 2019 से आईटी ऑथोरिटी के द्वारा सभी नोटिस, समन, आदेश आदि सेंट्रलाइज्ड कंप्यूटर से जारी किए जाएंगे सभी पुराने नोटिस 1 अक्टूबर से फिर से सिस्टम में अपलोड किया जाएगा

 उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि पूंजी बाजार में रौनक लाने के लिए लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर सरचार्ज को खत्म किया गया

 स्टार्टअप्स और उसके निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स के प्रावधान को समाप्त किये जाने की घोषणा की गई बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये मुहैया कराया जाएंगे ताकि वे ज्यादा से ज्यादा कर्ज दे सकें

 वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों ने कहा है कि रेपो दर में कटौती का फायदा अपने ग्राहकों को पास करेंगे रेपो दर से ब्याज दर को सीधे जोड़ने से कार,घर खरीददारों और रिटेल सेक्टर को सस्ता ईएमआई मिल रहा है कर्ज लेने वाले ग्राहकों को जिनके कर्ज का भुगतान हो चुका है उन्हें 15 दिनों में दस्तावेज उपलब्ध कराया जाएगा

 वित्त मंत्री ने बताया कि मौजूदा ग्लोबल GDP 3.2% है और भारत की विकास दर इससे बेहतर स्थिति में है सुधारों के द्वारा स्थिति को मजबूत बनाया जायेगा

 करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि विजयदशमी से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट फेसलेस स्क्रूटनी शुरू करेगा टैक्सपेयर्स को परेशान नहीं किया जाएगा। टैक्स को लेकर सरकार संवेदनशील है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में जीएसटी रिटर्न और रिफंड को और आसान बनाया जाएगा


बिजनेस में राहत

वित्त मंत्री ने कहा है कि ईज ऑफ डूइंग के तहत बिजनेस मामलों का 48 घंटे में निपटारा होगा एमएसएमई और घर खरीददारों के लिए एक मजबूत आईबीसी लाया गया है साथ ही, विलय और अधिग्रहण को आसान किया जाएगा


ऑटो सेक्टर को राहत 

वित्त मंत्री ने वाहन उद्योग को राहत देते हुए घोषणा की कि मार्च 2020 तक बीएस-4 इंजन वाली गाड़ियों की बिक्री में कोई दिक्कत नहीं होगी ऐसे वाहन पंजीयन खत्म होने तक चलाए जा सकेंगे इसके साथ ही पंजीयन शुल्क बढ़ोतरी के फैसले को जून, 2020 तक टाल दिया गया केंद्र सरकार के विभागों द्वारा पुराने वाहनों के बदले नए वाहनों की खरीद पर लगी रोक हटाएगा


आधार द्वारा केवाईसी

गैर बैंकिंग कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आधार के जरिए केवाईसी की जा सकेगी एक लाख करोड़ रुपये तक की परिसंपत्तियों की खरीद के लिए ऋण योजना की प्रत्येक बैंक में निगरानी की जाएगी।

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म्यूच्यूअल फंड हेतु सेबी ने नए नियम जारी किये

Sebi tightens regulations for mutual funds to safeguard investors


भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI-सेबी) ने निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए नये नियमों कों जारी करने कि घोषणा की है। इन नियमों के तहत सेबी ऐसे सभी म्यूचुअल फंड के विरुद्ध कार्यवाही करेगा जिसमे डिफॉल्‍ट होने वाली कंपनी के प्रवर्तकों को शेयर के बदले ऋण दिया गया हो। इसके अतिरिक्त सेबी ने म्यूच्यूअल फंड हाउसेस के लिये कुछ नए और सख्त निवेश मापदंडों को भी मंजूरी दी है।

सेबी द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य उधारकर्ताओं के दिवालिया होने या घोटाला हो जाने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले ऋण जोखिम से निवेशकों की रक्षा करना है। वर्तमान में म्यूच्यूअल फंड उद्योग एक भारी वित्तीय संकट का सामना कर रहा है जिसके लिये उन फंड प्रबंधकों को जिम्मेदार ठहराया गया है जो ऋण योजनाओं के माध्यम से कंपनी प्रवर्तकों को उधार देते हैं। सेबी के अनुसार म्यूच्यूअल फंड बैंक नहीं होते हैं इसलिये उन्हें ऋण देने के बजाय बाजार में निवेश करना चाहिए।


सेबी द्वारा जारी नये नियम

म्यूचुअल फंड अब केवल सूचीबद्ध ऋण या इक्विटी (Debt or Equity) में ही निवेश कर सकते हैं।

➦ नए मापदंडों के अनुसार अब से जोखिम की गणना परिशोधन  के आधार पर नहीं बल्कि मार्क-टू-मार्केट आधार पर की जाएगी।

➦ किसी भी म्यूच्यूअल फंड को ऋण में निवेश करने के लिये चार गुना कवर प्रदान करना होगा और इसे इक्विटी द्वारा भी सुरक्षा प्रदान करनी होगी।

➦ इसके अतिरिक्त तरल म्यूच्यूअल फंड योजनाओं को अपनी कुल निवेश परिसंपत्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा नकद या गिल्ट फंड के रूप में बनाए रखना होगा, जो उन्हें प्रतिदान/शोधन/मोचन में मदद कर सकता है।


भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी। सेबी का मुख्यालय मुंबई में बांद्रा कुर्ला परिसर के व्यावसायिक जिले में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी व पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय हैं। सेबी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय स्टाक निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना और प्रतिभूति बाजार के विकास तथा नियमन को प्रवर्तित करना है। सेबी को एक गैर वैधानिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया जिसे SEBI ACT1992 के अन्तर्गत वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है।

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चीन ने अमेरिका को ‘रेयर अर्थ मिनरल’ की आपूर्ति रोकने हेतु संकेत दिये

China’s state planner suggests using rare earths in US trade war


चीन ने हाल ही में अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध में रेयर अर्थ मिनरल (धातु) को नया हथियार बनाने के संकेत दिये हैं चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, स्मार्टफोन से लेकर सैन्य हार्डवेयर तक बनाने में बेहद अहम इन धातुओं की अमेरिका को की जाने वाली आपूर्ति को रोका जा सकता है

चीन की स्मार्टफोन कंपनी हुवावेई ने अमेरिका की अदालत में कहा है कि उसके उपकरणों की खरीद पर लगे प्रतिबंध हटाये जाने चाहिये स्मार्टफोन कंपनी हुवावेई ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मार्च 2019 में याचिका दायर की थी। चीन के सरकारी मीडिया के अधिकारी ने कहा कि रेयर अर्थ संसाधन पहले चीन की जरूरतों को पूरा करेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि चीन दुनिया भर के देशों की वैधानिक जरूरतों की पूर्ति के लिये भी तैयार है

इन धातुओं का इस्तेमाल स्मार्टफोन और टेलीविजन से लेकर कैमरा और लाइट बल्ब बनाने में होता है रेयर अर्थ मिनरल में 16 तत्व आते हैं, जो दुनिया में चुनिंदा जगहों पर ही मिलते हैं इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफाइनरी, ग्लास इंडस्ट्री आदि में होता है


रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन चीन में सबसे ज्यादा

विश्व में सबसे ज्यादा रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन चीन में होता है। चीन अकेला करीब 70 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन करता है. इसके अलावा करीब 30 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका जैसे देशों में खनन किया जाता है


रेयर अर्थ मिनरल को कम करने से अमेरिका पर प्रभाव

चीन अगर अमेरिका को रेयर अर्थ मिनरल का निर्यात कम कर देगा तो इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफी प्रभावित हो जाएगा चीन यदि रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन कम करता है तो अमेरिका के लिए मलेशिया दूसरा विकल्प बनेगा। लेकिन, मलेशिया चीन जितना रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन नहीं कर पाता है दूसरी बात यह कि मलेशिया पर्यावरण को सुरक्षित रखने हेतु रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन कम करने की बात कह चुका है चीन यदि इसके निर्यात को सीमित करता है तो अमेरिका को अरबों डॉलर का झटका लगेगा


रेयर अर्थ मिनरल की मांग पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ी

स्मार्टफोन का मार्केट बढ़ने के बाद रेयर अर्थ मिनरल की मांग पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ी है रेयर अर्थ मिनरल कंप्यूटर मेमोरी, डीवीडी, रिचार्जेबल बैटरी, स्मार्टफोन के कई कंपोनेंट के साथ-साथ रक्षा से जुड़े कई उपकरणों को बनाने में भी इस्तेमाल होता है


पृष्ठभूमि

चीन पहले भी रेयर अर्थ मिनरल का निर्यात कम कर चुका है. चीन ने साल 2010 में जापान को निर्यात कम कर दिया था इससे जापान का इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफाइनरी, ग्लास इंडस्ट्री का मार्केट पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा था

उल्लेखनीय है कि चीन रेयर अर्थ धातुओं के कुल वैश्विक उत्पादन में अधिक हिस्सेदारी रखता है अमेरिका के कुल रेयर अर्थ आयात में चीन का करीब 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है अमेरिका ने साल 2014 से साल 2017 के दौरान लगभग 80 प्रतिशत 'रेयर अर्थ' का आयात चीन से किया था

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अमेरिका चीन ट्रेड वार, जानिए विस्तार से


अमेरिका ने हाल ही में चीन के साथ चल रही व्यापार वार्ता की धीमी प्रगति से हताश होकर इसी सप्ताह से दो सौ अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का विचार कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 200 अरब डॉलर के चीनी सामान के आयात पर शुल्क दर बढ़ाए जाने की चेतावनी के बाद चीन अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता को रद्द करने पर विचार कर रहा है

अमेरिका के राष्ट्रपति के अनुसार, 10 मई से वह चीन से आयात किए जाने वाले 200 अरब डॉलर के सामान पर शुल्क दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर सकते हैं


उच्च स्तरीय चीनी प्रतिनिधि मंडल की बैठक

चीन के उप-प्रधानमंत्री लियू हेई की अध्यक्षता वाले एक उच्च स्तरीय चीनी प्रतिनिधि मंडल की इस हफ्ते वाशिंगटन में बैठक होनी थी बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) का समाधान ढूंढना है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताओं को दूर किया जा सके चीन वाशिंगटन में 08 मई 2019 से शुरू होने वाली व्यापार वार्ता को रद्द करने पर विचार कर रहा है

व्यापार वार्ता में किसी नतीजे पर पहुँचने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप चीन के खिलाफ शुल्क बढ़ाने की समय सीमा दो बार जनवरी और मार्च में आगे खिसका चुके हैं.सीएनबीसी न्यूज ने कहा कि चीनी उप-प्रधानमंत्री अंतिम दौर की बातचीत के लिए की जाने वाली अपनी यात्रा को रद्द कर सकते हैं और उनके साथ ही 100 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भी इस यात्रा को रद्द कर सकता है


ट्रेड वार (व्यापार युद्ध) क्या है?

ट्रेड वार (व्यापार युद्ध) दो देशों के बीच एक ऐसा युद्ध होता है जिसमें किसी हथियार का नहीं बल्कि टैक्स (कर) का इस्तेमाल होता है। इस युद्ध में जन हानि नहीं बल्कि अर्थ की हानि होती है एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैक्स की दर बढ़ा देता है, जिससे आयात (इंपोर्ट) किया हुआ सामान महंगा हो जाता है। महंगे सामान की मांग कम हो जाती है जिसका असर उस देश पर पड़ता जिससे वह सामान निर्यात किया जा रहा है। ट्रेड वार से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है और इसकी वजह से राजनीतिक तनाव भी पैदा हो जाता है। अमेरिका ने साल 1930 में ऐसा ही किया था उसने अपने टैरिफ बढ़ा दिए थे. इसका असर यह हुआ कि पूरी दुनिया में मंदी का दौर आ गया था


अमेरिका चीन ट्रेड वार

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार युद्ध (ट्रेड वार) चल रहा है बता दें कि जुलाई 2018 के पहले हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी नीति को लागू करने की अनुमति दे दी थी जिसके तहत 50 अरब डॉलर मूल्य के चीन से आयतित सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा उधर, चीन ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया और पलटवार करते हुए अपने यहाँ आने वाले अमेरिकी सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की घोषणा कर दी थी

अब तक अमेरिका चीन पर व्यापार के लिए गलत तरीके अपनाने का आरोप लगाता रहा है और 250 अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर आयात कर लगा चुका है इसके उत्तर में चीन मे 110 अरब डॉलर की अमरीकी वस्तुओं पर आयात कर लगाए हैं और 'इसे इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड वॉर' करार देते हुए इसका आरोप अमरीका पर लगाया है

अमरीकी राष्ट्रपति ने सितंबर 2018 में इन वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया था इसे जनवरी 2019 में बढ़ाया जाना था लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत जारी होने के कारण ये कदम नहीं उठाया गया था चीन ने डॉलर का बदला डॉलर से लेने का इरादा जाहिर करते हुए अमेरिकी निर्यात पर 'तत्काल' शुल्क लगा दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस टकराव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में खलबली पैदा हो जाएगी और विश्व व्यापार प्रणाली पर इसका काफी नकारात्मक असर पड़ेगा

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हांगकांग का शेयर बाजार दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बना

Hong Kong Overtakes Japan as World's Third Largest Stock Market


केवल अमेरिकी और मुख्य भूमि चीन से पीछे हांगकांग का इक्विटी बाजार मूल्य में जापान पीछे कर दुनिया का तीसरे सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया है। ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार जापान के लिए 5.76 ट्रिलियन डॉलर की तुलना में हांगकांग का मार्केट कैप 5.78 ट्रिलियन डॉलर था, जहाँ प्राथमिक प्रतिभूतियां सूचीबद्ध हैं।

एशियाई शहर ने हैंग सेंग सूचकांक 2019 में 17% की वृद्धि प्राप्त की, जब यह 15 जून से अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। इंटरनेट की दिग्गज टेनसेंट होल्डिंग्स लिमिटेड 22% लाभ के साथ मुख्य चालक रही है। उस अवधि में जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 8.3% उन्नत हुआ।

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आरबीआई ने पीएनबी पर लगाया 2 करोड़ रुपये का जुर्माना, ये है वजह

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई द्वारा यह घोषणा 26 मार्च 2019 को की गई थी। पीएनबी पर वित्तीय लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग करने का आरोप है। दरअसल आरबीआई ने स्विफ्ट परिचालन के संदर्भ में नियामकीय निर्देशों का अनुपालन नहीं करने को लेकर सरकारी क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है 

मामला क्या है?
स्विफ्ट वैश्विक मैसेजिंग सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल वित्तीय इकाइयों द्वारा वैश्विक स्तर पर होने वाले लेनदेन के लिए किया जाता है. पीएनबी में आभूषण कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी द्वारा किए गए 14,000 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में इसी मैसेजिंग सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग किया गया था। 

मुख्य तथ्य
आरबीआई ने विभिन्न निर्देशों के समयबद्ध क्रियान्वयन और स्विफ्ट परिचालन को मजबूत करने में विफल रहने वाले 36 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों पर 71 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। 
आरबीआई द्वारा जिन प्रमुख बैंकों पर जुर्माना लगाया गया था उनमें एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचएसबीसी, बैंक ऑफ बड़ौदा, सिटी बैंक, केनरा बैंक और यस बैंक शामिल हैं. हालांकि, इस सूची में पीएनबी का नाम नहीं था। 
रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआई ने मार्च 2019 में विभिन्न निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर चार बैंकों पर जुर्माना लगाया था जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), यूनियन बैंक, देना बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल थे। 
इसमें यूनियन बैंक पर तीन करोड़ रुपये, देना बैंक पर दो करोड़ रुपये और आईडीबीआई बैंक तथा एसबीआई पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। 

स्विफ्ट क्या है?
स्विफ्ट एक ऐसा नेटवर्क प्रदान करता है जो वित्तीय संस्थानों को एक सुरक्षित, मानकीकृत और विश्वसनीय वातावरण में वित्तीय लेनदेन के बारे में जानकारी भेजने और प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।  स्विफ्ट प्रत्येक वित्तीय संगठन को एक अनोखा कोड प्रदान करता है, जिसमें आठ अक्षर या 11 वर्ण हैं।  कोड को एकांतर रूप से बैंक पहचानकर्ता कोड (बीआईसी), स्विफ्ट कोड, स्विफ्ट आईडी या आईएसओ 9362 कोड कहा जाता है। 

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मुकेश अंबानी ने अनिल अंबानी की 550 करोड़ रुपये बकाया चुकाने में मदद की


अनिल अंबानी ने मुकेश अंबानी द्वारा वित्तीय सहायता दिए जाने के बाद दूरसंचार उपकरण कंपनी एरिक्सन का बकाया भुगतान कर दिया है। इसके फलस्वरूप रिलायंस कम्युनिकेशंस के मालिक अनिल अंबानी जेल जाने से बच गए हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अनिल को 19 मार्च 2019 तक एरिक्सन का बकाया चुकाना था अन्यथा उन्हें कोर्ट की मानहानि के मामले में जेल जाना पड़ता

इस मामले में अनिल के साथ साथ आरकॉम की दो इकाइयों के चेयरमैन छाया विरानी और सतीश सेठ पर जेल जाने का खतरा मंडरा रहा था रिलायंस कम्‍युनिकेशंस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एरिक्‍सन को 550 करोड़ रुपये और इस पर ब्‍याज का भुगतान कर दिया है इससे पहले आरकॉम ने 460 करोड़ रुपए की अंतिम किस्‍त का भुगतान कर दिया है आरकॉम ने इससे पहले 118 करोड़ रुपए का भुगतान किया था

मुकेश अंबानी द्वारा अनिल अंबानी की वित्तीय सहायता करने का यह दूसरा बड़ा अवसर है इससे पूर्व वर्ष 2018 में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इंफोकॉम ने आरकॉम की वायर`लेस सेवा को 3000 करोड़ रुपये में खरीदा था


क्या था मामला?

➦ रिलायंस कम्युनिकेशन्स और एरिक्‍सन के बीच 2017 में कानूनी जंग शुरू हुई थी एरिक्‍सन ने दिवालिया अदालत में आरकॉम पर आरोप लगाया था कि वर्ष 2013 में आरकॉम के नेटवर्क की देखरेख को लेकर हुए सात वर्ष के सौदे के तहत उसे 1500 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया

➦ इसके बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल से नेशनल कंपनी लॉ अपीलैट ट्रिब्‍यूनल में चला गया

➦ यहाँ पर दोनों कंपनियों के बीच 30 सितंबर 2018 तक 550 करोड़ रुपये का भुगतान करने की सहमति बनी

➦ 30 सितम्‍बर तक आरकॉम की ओर से भुगतान नहीं मिलने पर एरिक्‍सन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली

➦ सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को 15 दिसंबर 2018 तक भुगतान करने को कहा. इस तारीख तक भी भुगतान नहीं हो पाया

➦ जब 550 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया तो एरिक्‍सन ने आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी और उनकी दो यूनिट के खिलाफ अवमानना की याचिकाएं दाखिल कीं फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को फटकार लगाई और कहा कि 19 मार्च तक ब्‍याज सहित भुगतान किया जाए

➦ आखिर अनिल अंबानी के बड़े भाई मुकेश अंबानी ने बकाया रकम चुकता की और मामला समाप्त किया

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भारतीय रिजर्व बैंक ने फेडरल बैंक पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया


भारतीय रिजर्व बैंक ने नियमों की अनदेखी के लिए फेडरल बैंक पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक ने दी। 

रिजर्व बैंक ने फेडरल बैंक पर यह जुर्माना बड़े कर्ज लेने वाले के बारे में रिपोर्ट करने में चूक और ग्राहकों को मुआवजे का भुगतान नहीं करने और अन्य उल्लंघनों के लिए लगाया गया है। 


फेडरल बैंक पर जुर्माना क्यों लगा?

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, फेडरल बैंक ने बड़े कर्ज को लेकर केंद्रीय रिपॉजिटरी पर रिपोर्टिंग संबंधी नियमों का अनुपालन नहीं किया है। यह एक बड़ी चूक है। इसके अलावा फेडरल बैंक जोखिम आधारित निगरानी आकलन के संबंध में रिजर्व बैंक को रिपोर्ट नहीं कर पाया है। साथ ही बैंक ने एटीएम संबंधित शिकायतों का निपटारा करने में होने वाली देरी के लिए दिए जाने वाला जुर्माना भी नहीं दिया है। इसके अलावा बैंक केवाईसी और मनी लांड्रिंग रोकने के लिए बनाए गए नियमों का पालन करने में असफल रहा है। 


अन्य बैंक पर भी लगाया जा चुका है जुर्माना

करूर वैश्य बैंक पर भी लगाया जा चुका है जुर्माना इससे पहले आरबीआई प्राइवेट क्षेत्र के बैंक करूर वैश्य बैंक पर भी 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा चुका है। आरबीआई ने इस बैंक पर जरूरी निर्देश नहीं मानने पर यह जुर्माना लगाया है। 

इसके अलावा आरबीआई ने बीते सप्ताह ही प्राइवेट सेक्टर के बंधन बैंक पर लाइसेंसिंग शर्तों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की थी। केंद्रीय बैंक ने बंधन बैंक पर नई शाखाएं खोलने से रोकने के अलावा बैंक के एमडी और सीईओ के सैलरी खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने यूनियन बैंक आफ इंडिया पर धोखाधड़ी पकड़ने और उसके बारे में रिपोर्ट करने में देरी को लेकर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। यूनियन बैंक आफ इंडिया की ओर से जारी रिजर्व बैंक ने हमारे ऊपर धोखाधड़ी पकड़ने और उसके बारे में रिपोर्ट करने में विलंब को लेकर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। 

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सेबी ने शेयर बायबैक नियमों को संशोधित किया


भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 17 सितम्बर 2018 को शेयरों को वापस खरीदने (बायबैक) के नियमों में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य शेयर बायबैक के लिए सार्वजनिक रूप से कोई घोषणा करने की जरूरत पर और ज्यादा स्पष्टता लाना है।

सेबी के अनुसार क्रेडिट रेटिंग संस्थाएं पब्लिक या राइट्स इश्यू के जरिये ऑफर की गई सिक्युरिटीज की रेटिंग के अलावा और किसी भी तरह की गतिविधि में शामिल नहीं होंगी।

मुख्य तथ्य
  • सेबी के मुताबिक रेटिंग कंपनी को वित्तीय प्रतिभूतियों की रेटिंग तय करने और आर्थिक अथवा वित्तीय शोध एवं विश्लेषण कार्य अलावा दूसरे कामों को अलग कंपनी में बांटने का नियम लागू किया है। इसके लिए दो साल का समय दिया गया है।
  • नए नियमों के तहत सेबी ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों को किसी कंपनी में शेयर खरीदने या ओपन ऑफर में बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है।
  • सेबी ने 11 सितंबर को जारी अधिसूचना में कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी किसी भी कंपनी के ओपन ऑफर के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बोली नहीं लगा सकता है। इसके साथ ही कंपनी अधिनियम 2013 के अनुरूप ‘मुक्त आरक्षित भंडार’ के बारे में स्पष्टीकरण को नये ढांचे में शामिल किया गया है।
  • सेबी ने भाषा के सरलीकरण, अस्पष्टता खत्म करने और अप्रैल 2014 में अस्तित्व में आए नए कंपनी कानून के हिसाब से नए रेफरेंस जोड़ने के लिए शेयर बायबैक के नियमों में संशोधन किया है।
  • कोई भी कंपनी जिसे शेयरों की वापस खरीद की अनुमति दी जाती है उसे दो कार्यदिवसों के भीतर इसकी सार्वजनिक घोषणा करनी होगी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है। इसकी स्थापना सेबी अधिनियम 1992 के तहत 12 अप्रैल 1992 में हुई। सेबी का मुख्यालय मुंबई में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

सेबी के अस्तित्व में आने से पहले पूंजी निर्गम नियंत्रक नियामक प्राधिकरण था, जिसे पूंजी मुद्दे (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 के अंतर्गत अधिकार प्राप्त थे। सेबी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय स्टाक निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना और प्रतिभूति बाजार के विकास तथा नियमन को प्रवर्तित करना है।

बायबैक क्या है

बायबैक एक निर्धारित समय में पूरी की जाने वाली एक प्रक्रिया है जिसमें निवेशकों के अतिरिक्त शेयरों को अपने सरप्लस का इस्तेमाल कर खुले बाजार से खरीदा जाता है. ये शेयर बाजार मूल्य या उससे ज्यादा कीमत पर खरीदे जाते हैं।

अधिसूचना के मुताबिक कंपनी निदेशक मंडल की बायबैक के लिये मंजूरी मिलने और इस पेशकश को स्वीकार करने वाले शेयरधारकों को भुगतान मिलने की तिथि को बायबैक अवधि के तौर पर परिभाषित किया गया है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा



मुकेश अंबानी की स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) का कुल मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) पहली बार 8 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज इस स्तर तक पहुँचने वाली देश की पहली कंपनी बन गर्इ है

1.27 प्रतिशत बढ़त के साथ रिलायंस के एक शेयर की कीमत 1,262 रुपये हो गई और कंपनी का मार्केट कैप 8,00,001.54 करोड़ रुपये तक पहुँच गया आरआईएल ने मार्केट कैप के मामले में टीसीएस को पीछे छोड़ा है टीसीएस का मार्केट कैप 7,77,870 करोड़ रुपये है

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने लगभग ग्यारह वर्ष के अन्तराल के बाद 100 अरब डॉलर (लगभग 68 खरब रुपये) का आंकड़ा छुआ है गौरतलब है कि आरआईएल तेल से लेकर टेलिकॉम के क्षेत्र में काम करता हैरिलायंस के 41वीं वार्षिक सम्मेलन में मुकेश अंबानी ने कहा था कि कंपनी वर्ष 2025 तक दोगुना विस्तार करना चाहती है

बाजार पूंजीकरण तथा भारतीय कम्पनियां
  • बाजार पूंजीकरण के मामले में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे नंबर पर टाटा कंसल्टेंसजी सर्विसेज (टीसीएस) है
  • टीसीएस  का कुल मार्केट कैप 7.8 लाख करोड़ रुपये है 
  • लगभग 5.69 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण के साथ एचडीएफसी बैंक तीसरे और हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) चौथे स्थान पर है। एचयूएल का कुल मार्केट कैप 3.82 लाख करोड़ रुपये है
  • देश के पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी की बात करें तो 3.79 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ आर्इटीसी पांचवे स्थान पर है

मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) क्या है?

कंपनी के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का मतलब है शेयर बाजार द्वारा निर्धारित उस कंपनी का मूल्य शेयर बाजार में कंपनियों को अपने मार्केट कैप के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि प्रत्येक वर्ग अपने कुछ विशेष लक्षण दर्शाता है कंपनी के एक शेयर की कीमत से कुल शेयरों की संख्या को गुणा करके इसकी गणना की जाती है
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रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर आदमी बने


मुकेश अंबानी ने यह मुकाम अलीबाबा ग्रुप के संस्थापक जैक मा को पछाड़ते हुए हासिल किया है।    रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी अब एशिया के सबसे अमीर आदमी बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि चीनी कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा को पछाड़ते हुए हासिल की है। खबरों के मुताबिकशुक्रवार को मुकेश अंबानी की संपत्ति 44.3 बिलियन डॉलर यानी 3.012 लाख करोड़ रुपये हो गई. उधर गुरुवार को बंद हुए शेयर बाजार के भाव के अनुसार जैक मा की नेटवर्थ 44 अरब डॉलर यानी 2.99 लाख करोड़ रुपये की रही। इन आंकड़ों के मद्देनजर भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस समूह के शेयरों में जबरदस्त तेजी भी देखने को मिली।     हिंदुस्तान में टेलीकॉम से लेकर पेट्रो कैमिकल्स जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करने वाली रिलायंस समूह के अध्यक्ष की दौलत में इस साल 27.2 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। उधर, साल 2018 के दौरान जैक मा की कुल दौलत में 9500 करोड़ रुपये की कमी आई है। इस बीच हाल में हुई एजीएम बैठक के दौरान मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ई-कॉमर्स बाजार में भी उतरने की घोषणा की थी। इसके अलावा इसी साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलांयस अपनी टेलीकॉम कंपनी जियो की ब्रॉडबैंड और डीटीएच सेवाएं शुरू करने की बात भी कर चुकी है।    मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के नाम पर इसी साल एक खास उपलब्धि तब जुड़ी थी जब यह दुनिया की 100 अरब डॉलर कंपनियों के क्लब में शामिल हुई थी। हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से इसे इस क्लब से बाहर भी होना पड़ा था। लेकिन इसी गुरुवार को रिलायंस यह मुकाम दोबारा हासिल कर लिया था।


मुकेश अंबानी ने यह मुकाम अलीबाबा ग्रुप के संस्थापक जैक मा को पछाड़ते हुए हासिल किया है

रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी अब एशिया के सबसे अमीर आदमी बन गए हैं उन्होंने यह उपलब्धि चीनी कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा को पछाड़ते हुए हासिल की है खबरों के मुताबिकशुक्रवार को मुकेश अंबानी की संपत्ति 44.3 बिलियन डॉलर यानी 3.012 लाख करोड़ रुपये हो गई. उधर गुरुवार को बंद हुए शेयर बाजार के भाव के अनुसार जैक मा की नेटवर्थ 44 अरब डॉलर यानी 2.99 लाख करोड़ रुपये की रही इन आंकड़ों के मद्देनजर भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस समूह के शेयरों में जबरदस्त तेजी भी देखने को मिली। 

हिंदुस्तान में टेलीकॉम से लेकर पेट्रो कैमिकल्स जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करने वाली रिलायंस समूह के अध्यक्ष की दौलत में इस साल 27.2 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है उधर, साल 2018 के दौरान जैक मा की कुल दौलत में 9500 करोड़ रुपये की कमी आई है इस बीच हाल में हुई एजीएम बैठक के दौरान मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ई-कॉमर्स बाजार में भी उतरने की घोषणा की थी इसके अलावा इसी साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलांयस अपनी टेलीकॉम कंपनी जियो की ब्रॉडबैंड और डीटीएच सेवाएं शुरू करने की बात भी कर चुकी है

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के नाम पर इसी साल एक खास उपलब्धि तब जुड़ी थी जब यह दुनिया की 100 अरब डॉलर कंपनियों के क्लब में शामिल हुई थी हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से इसे इस क्लब से बाहर भी होना पड़ा था लेकिन इसी गुरुवार को रिलायंस यह मुकाम दोबारा हासिल कर लिया था
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