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चीन ने अमेरिका को ‘रेयर अर्थ मिनरल’ की आपूर्ति रोकने हेतु संकेत दिये

China’s state planner suggests using rare earths in US trade war


चीन ने हाल ही में अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध में रेयर अर्थ मिनरल (धातु) को नया हथियार बनाने के संकेत दिये हैं चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, स्मार्टफोन से लेकर सैन्य हार्डवेयर तक बनाने में बेहद अहम इन धातुओं की अमेरिका को की जाने वाली आपूर्ति को रोका जा सकता है

चीन की स्मार्टफोन कंपनी हुवावेई ने अमेरिका की अदालत में कहा है कि उसके उपकरणों की खरीद पर लगे प्रतिबंध हटाये जाने चाहिये स्मार्टफोन कंपनी हुवावेई ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मार्च 2019 में याचिका दायर की थी। चीन के सरकारी मीडिया के अधिकारी ने कहा कि रेयर अर्थ संसाधन पहले चीन की जरूरतों को पूरा करेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि चीन दुनिया भर के देशों की वैधानिक जरूरतों की पूर्ति के लिये भी तैयार है

इन धातुओं का इस्तेमाल स्मार्टफोन और टेलीविजन से लेकर कैमरा और लाइट बल्ब बनाने में होता है रेयर अर्थ मिनरल में 16 तत्व आते हैं, जो दुनिया में चुनिंदा जगहों पर ही मिलते हैं इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफाइनरी, ग्लास इंडस्ट्री आदि में होता है


रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन चीन में सबसे ज्यादा

विश्व में सबसे ज्यादा रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन चीन में होता है। चीन अकेला करीब 70 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन करता है. इसके अलावा करीब 30 प्रतिशत रेयर अर्थ मिनरल म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका जैसे देशों में खनन किया जाता है


रेयर अर्थ मिनरल को कम करने से अमेरिका पर प्रभाव

चीन अगर अमेरिका को रेयर अर्थ मिनरल का निर्यात कम कर देगा तो इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफी प्रभावित हो जाएगा चीन यदि रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन कम करता है तो अमेरिका के लिए मलेशिया दूसरा विकल्प बनेगा। लेकिन, मलेशिया चीन जितना रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन नहीं कर पाता है दूसरी बात यह कि मलेशिया पर्यावरण को सुरक्षित रखने हेतु रेयर अर्थ मिनरल का उत्पादन कम करने की बात कह चुका है चीन यदि इसके निर्यात को सीमित करता है तो अमेरिका को अरबों डॉलर का झटका लगेगा


रेयर अर्थ मिनरल की मांग पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ी

स्मार्टफोन का मार्केट बढ़ने के बाद रेयर अर्थ मिनरल की मांग पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ी है रेयर अर्थ मिनरल कंप्यूटर मेमोरी, डीवीडी, रिचार्जेबल बैटरी, स्मार्टफोन के कई कंपोनेंट के साथ-साथ रक्षा से जुड़े कई उपकरणों को बनाने में भी इस्तेमाल होता है


पृष्ठभूमि

चीन पहले भी रेयर अर्थ मिनरल का निर्यात कम कर चुका है. चीन ने साल 2010 में जापान को निर्यात कम कर दिया था इससे जापान का इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफाइनरी, ग्लास इंडस्ट्री का मार्केट पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा था

उल्लेखनीय है कि चीन रेयर अर्थ धातुओं के कुल वैश्विक उत्पादन में अधिक हिस्सेदारी रखता है अमेरिका के कुल रेयर अर्थ आयात में चीन का करीब 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है अमेरिका ने साल 2014 से साल 2017 के दौरान लगभग 80 प्रतिशत 'रेयर अर्थ' का आयात चीन से किया था

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अमेरिका चीन ट्रेड वार, जानिए विस्तार से


अमेरिका ने हाल ही में चीन के साथ चल रही व्यापार वार्ता की धीमी प्रगति से हताश होकर इसी सप्ताह से दो सौ अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का विचार कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 200 अरब डॉलर के चीनी सामान के आयात पर शुल्क दर बढ़ाए जाने की चेतावनी के बाद चीन अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता को रद्द करने पर विचार कर रहा है

अमेरिका के राष्ट्रपति के अनुसार, 10 मई से वह चीन से आयात किए जाने वाले 200 अरब डॉलर के सामान पर शुल्क दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर सकते हैं


उच्च स्तरीय चीनी प्रतिनिधि मंडल की बैठक

चीन के उप-प्रधानमंत्री लियू हेई की अध्यक्षता वाले एक उच्च स्तरीय चीनी प्रतिनिधि मंडल की इस हफ्ते वाशिंगटन में बैठक होनी थी बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) का समाधान ढूंढना है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताओं को दूर किया जा सके चीन वाशिंगटन में 08 मई 2019 से शुरू होने वाली व्यापार वार्ता को रद्द करने पर विचार कर रहा है

व्यापार वार्ता में किसी नतीजे पर पहुँचने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप चीन के खिलाफ शुल्क बढ़ाने की समय सीमा दो बार जनवरी और मार्च में आगे खिसका चुके हैं.सीएनबीसी न्यूज ने कहा कि चीनी उप-प्रधानमंत्री अंतिम दौर की बातचीत के लिए की जाने वाली अपनी यात्रा को रद्द कर सकते हैं और उनके साथ ही 100 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल भी इस यात्रा को रद्द कर सकता है


ट्रेड वार (व्यापार युद्ध) क्या है?

ट्रेड वार (व्यापार युद्ध) दो देशों के बीच एक ऐसा युद्ध होता है जिसमें किसी हथियार का नहीं बल्कि टैक्स (कर) का इस्तेमाल होता है। इस युद्ध में जन हानि नहीं बल्कि अर्थ की हानि होती है एक देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर टैक्स की दर बढ़ा देता है, जिससे आयात (इंपोर्ट) किया हुआ सामान महंगा हो जाता है। महंगे सामान की मांग कम हो जाती है जिसका असर उस देश पर पड़ता जिससे वह सामान निर्यात किया जा रहा है। ट्रेड वार से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है और इसकी वजह से राजनीतिक तनाव भी पैदा हो जाता है। अमेरिका ने साल 1930 में ऐसा ही किया था उसने अपने टैरिफ बढ़ा दिए थे. इसका असर यह हुआ कि पूरी दुनिया में मंदी का दौर आ गया था


अमेरिका चीन ट्रेड वार

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार युद्ध (ट्रेड वार) चल रहा है बता दें कि जुलाई 2018 के पहले हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी नीति को लागू करने की अनुमति दे दी थी जिसके तहत 50 अरब डॉलर मूल्य के चीन से आयतित सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा उधर, चीन ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया और पलटवार करते हुए अपने यहाँ आने वाले अमेरिकी सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की घोषणा कर दी थी

अब तक अमेरिका चीन पर व्यापार के लिए गलत तरीके अपनाने का आरोप लगाता रहा है और 250 अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं पर आयात कर लगा चुका है इसके उत्तर में चीन मे 110 अरब डॉलर की अमरीकी वस्तुओं पर आयात कर लगाए हैं और 'इसे इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड वॉर' करार देते हुए इसका आरोप अमरीका पर लगाया है

अमरीकी राष्ट्रपति ने सितंबर 2018 में इन वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया था इसे जनवरी 2019 में बढ़ाया जाना था लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत जारी होने के कारण ये कदम नहीं उठाया गया था चीन ने डॉलर का बदला डॉलर से लेने का इरादा जाहिर करते हुए अमेरिकी निर्यात पर 'तत्काल' शुल्क लगा दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस टकराव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में खलबली पैदा हो जाएगी और विश्व व्यापार प्रणाली पर इसका काफी नकारात्मक असर पड़ेगा

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